Reported by: Adrash Tripathi
Edited by: Amit Yadav
महराजगंज: जिले के पुलिस महकमे में प्रशासनिक कसावट के दावों की धज्जियां किस प्रकार उड़ रही हैं, इसकी बानगी नौतनवां थाने में साफ देखने को मिल रही है। प्रशासनिक फेरबदल के तहत महीनों पहले तबादला होने के बावजूद आरक्षी अरविंद खरवार अभी भी नौतनवां थाने की मलाईदार कुर्सी पर जमे हुए हैं। आलम यह है कि उच्चाधिकारियों के आदेश यहां कागजों तक ही सीमित होकर रह गए हैं, जिससे महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
फाइलों में दम तोड़ रहा ‘तबादला एक्सप्रेस’ का आदेश
बीते कुछ महीने पूर्व महराजगंज पुलिस विभाग में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया था। इस तबादला सूची में कई उपनिरीक्षकों के साथ आरक्षी निगलेश पाण्डेय, पवन यादव और अरविंद खरवार के नाम भी शामिल थे। नियमानुसार सूची जारी होते ही संबंधित कर्मियों को नए कार्यक्षेत्र के लिए कार्यमुक्त (रिलीज़) कर दिया जाना चाहिए था। लेकिन, इन रसूखदार पुलिसकर्मियों ने नियमों को ताक पर रखकर अपने पुराने कार्यक्षेत्र पर ही कब्जा जमाए रखा।
जब यह मामला मीडिया के प्रकाश में आया, तब जाकर प्रशासन की नींद टूटी। आनन-फानन में आरक्षी निगलेश पाण्डेय और पवन यादव के कार्यक्षेत्र में तो फेरबदल कर दिया गया, परंतु बड़ा सवाल यह है कि आरक्षी अरविंद खरवार अब तक नौतनवां थाने में किस रसूख के बल पर जमे हुए हैं? यह चर्चा अब पूरे जिले के पुलिस हलकों में आम हो चुकी है।
बौखलाए आरक्षी ने पत्रकार को दी धमकी
एक तरफ जहां नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, वहीं इस प्रशासनिक खेल को उजागर करने वाले मीडियाकर्मियों को भी दबंग पुलिसकर्मियों के गुस्से का शिकार होना पड़ रहा है। तबादला होने से बौखलाए आरक्षी पवन यादव ने खबर छापने वाले स्थानीय पत्रकार को सीधे व्हाट्सएप कॉल धमकीभरे लहजे में आरक्षी ने कहा “अब हमारा ट्रांसफर हो गया है, अब मेरी खबर मत छापिएगा, नहीं तो अच्छा नहीं होगा।” खाकी वर्दी की आड़ में इस तरह खुलेआम पत्रकारों को धमकाना और प्रशासनिक आदेशों को ठेंगा दिखाना न केवल प्रेस की स्वतंत्रता पर करारा प्रहार है, बल्कि कानून के राज को भी खुली चुनौती है।




